मुझे अक्सर दूसरे पैरेंट्स से ये सुनने को मिलता है – “यार, मेरा बच्चा रोज़ फोन के लिए पीछे पड़ा रहता है… क्या सही टाइम आ गया है उसको उसका पहला मोबाइल देने का?”
अगर आपका बच्चा भी 8-14 साल की उम्र का है, तो ये सवाल आपके दिमाग में भी घूम रहा होगा।
आजकल situation ये है कि दोस्तों के पास फोन है और अगर आपके बच्चे के पास नहीं है तो उसे लगता है कि वो पीछे छूट रहा है। लेकिन फिर भी दिल में एक डर बैठा रहता है – क्या वो smartphone के लिए ready है या अभी early है?

सही टाइम कैसे पहचानें?
कोई perfect age नहीं है – मतलब ऐसा नहीं कि 13 होते ही फोन दे देना चाहिए। लेकिन कुछ चीज़ें चेक कर सकते हो:
- ज़िम्मेदारी निभाता है या नहीं – मान लो घर का छोटा-मोटा काम खुद से कर लेता है, rules follow करता है, तो समझो थोड़ा भरोसा किया जा सकता है।
- School performance – अगर already पढ़ाई में struggle कर रहा है, तो smartphone distraction ही बढ़ाएगा। लेकिन अगर grades ठीक-ठाक हैं और homework manage करता है, तो chances अच्छे हैं।
- Mental health – ये point बहुत important है। अगर बच्चा anxiety या बहुत ज्यादा screen addiction tendencies दिखा रहा है तो रुकना बेहतर है।
- Age factor – honestly, middle school (11-13 years) वो age है जब ज़्यादातर parents consider करते हैं। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि सीधा iPhone दे दो। First phone for kids simple होना चाहिए – call, SMS, और basic features वाले।
Smartphone देने के खतरे
ये तो सबको पता है लेकिन फिर भी repeat करना ज़रूरी है:
- Wrong content – बच्चे बहुत जल्दी internet की दुनिया explore कर लेते हैं और चीज़ें देख लेते हैं जो उनकी उम्र के लिए सही नहीं हैं।
- Cyberbullying – half of teens कभी न कभी cyberbullying face करते हैं। Mental health और confidence पर सीधा असर डालता है।
- Excessive screen time – आजकल 8-12 साल के बच्चे 5.5 घंटे और teens 9 घंटे तक screen पर रहते हैं। Result – नींद खराब, कम physical activity, कम focus।
- Real life miss करना – सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि बच्चे बाहर खेलना, दोस्तों से मिलना, creative चीज़ें करना miss कर देते हैं।

इंडिया में Practical Solutions (जब Gabb जैसी company यहाँ नहीं है)
अमेरिका में तो Gabb.com जैसी companies बच्चों के लिए child safe phones बना रही हैं। लेकिन इंडिया में अभी ऐसे options directly available नहीं हैं। तो यहाँ थोड़ी jugad करनी पड़ेगी:
- पुराना smartphone customize करो
- Data off रखो, सिर्फ calls/SMS allow करो।
- Unwanted apps delete कर दो।
- Screen time limits set करो।
- Feature phone (basic keypad phone)
Market में आज भी Nokia जैसे keypad phones मिलते हैं। Calls और SMS के लिए perfect हैं और बच्चों को connected भी रखते हैं। - Parental control apps
अगर smartphone देना ही है तो Google Family Link, Qustodio, Norton Family जैसे apps use करो। इससे आप track कर सकते हो कि बच्चा कितना और क्या use कर रहा है। - Time-based phone usage
Phone full time बच्चे के पास न रहे। सिर्फ बाहर जाने या emergency के लिए दो। घर पर आते ही अपने पास रख लो। - Family rules बनाओ
- Phone bedroom में use ना हो।
- Night में charging parents के room में हो।
- हर महीने बच्चे से “tech talk” करो – अच्छा-बुरा experience discuss करो।
मेरी राय

मैं मानता हूँ कि बच्चों को phone eventually देना ही है, लेकिन पहला phone हमेशा safe और controlled होना चाहिए। इंडिया में फिलहाल सबसे practical तरीका यही है कि या तो basic feature phone दो या फिर पुराना smartphone को customize करके “kids safe” बना दो।
फोन का मकसद बच्चे को comfort और safety देना होना चाहिए, ना कि उन्हें social media की race में झोंकना।

