Comparison (तुलना) करना कैसे बंद करे ?

Comparison हम जाने-अनजाने, कभी न कभी, किसी न किसी इंसान से ज़रूर करते हैं—चाहे वह परिचित हो या अपरिचित। इसका कोई ठोस कारण नहीं है कि हम ऐसा क्यों करते हैं, मेरे हिसाब से यह human nature का हिस्सा है। अक्सर हम तब comparison करते हैं जब जीवन में किसी चीज़ की कमी महसूस होती है, और वह कमी हमें दूसरों की life में नहीं दिखती।

उदाहरण के लिए, अगर आपके बाल नहीं हैं (मेरे case में) और किसी के घने और सुंदर बाल हैं, तो आप अपने आप को उनसे compare करने लगेंगे। या फिर, अगर कोई पढ़ाई में आपसे बेहतर है और उसके marks ज्यादा हैं, तो आप भी खुद को उसके साथ compare करने लगेंगे।

पहले के समय में हम comparison सिर्फ अपने आस-पास के लोगों से करते थे। जैसे कि school में मेरा competition सिर्फ मेरे classmates से था, जो पढ़ाई में मुझसे लगभग उतने ही smart थे। यह एक healthy competition भी था, जो मुझे better marks पाने के लिए motivate करता था।

लेकिन अब इंटरनेट और social media खुलते ही हमारा comparison पूरी digital generation से होने लगा है।

  • किसी के 1000+ friends हैं, कोई घूम रहा है, कोई award जीत रहा है।
  • किसी ने बड़ा घर खरीदा, किसी ने नई कार ली।
  • YouTube और Instagram पर हर किसी की highlight life दिखाई जाती है।

जो देख रहा है, उसे लगता है कि सबकी life perfect है, और वह अपनी life को इन सबके साथ compare करने लगता है। यह comparison internet addiction और social media के pressure से और बढ़ जाता है, और हमारा mind हमेशा restless रहता है।


मेरा personal experience

मैंने कुछ समय से internet को 99% बेकार की चीज़ों के लिए surf करना बंद कर दिया है। इससे क्या हुआ?

  • सबसे बड़ी बात, मुझे वह comparison वाली feeling नहीं आती।
  • मैं अब अपने आप पर focus करता हूँ, और मेरा competition सिर्फ खुद से है।
  • मैं रोज अपनी productivity और habits पर काम कर रहा हूँ—जैसे इंटरनेट पर बेवजह time waste न करना।

Comparison कैसे बंद करें: Practical tips

  1. Situations check करें: जब भी अपने आप को किसी से compare करें, देखें कि क्या आपकी life situations एक जैसी हैं। अगर नहीं, तो comparison मत करें।
    • उदाहरण: किसी अमीर परिवार में पैदा हुआ लड़का आपसे बड़े घर खरीद सकता है, लेकिन आप नहीं। Comparison बेवकूफी है।
  2. Nature का difference समझें: हर किसी का nature अलग होता है। अगर किसी को घूमने में मज़ा आता है, वह trips पर जाएगा, लेकिन आपको बैठकर काम करना पसंद है। तो comparison करने का मतलब क्या?
  3. अपनी uniqueness पर focus करें: हम सब अलग काम के लिए बने हैं। मैं designing और writing के लिए बना हूँ, कोई और programming या carpentry के लिए। Comparison pointless है।
  4. Impact को समझें: अगर आप अपनी unique skills और efforts से किसी की life में contribution कर रहे हैं, तो media या TV पर दिखना जरूरी नहीं। हर इंसान का success और impact अलग होता है।

Final thoughts

Comparison सिर्फ खुद से करें, और अपनी life को किसी और से measure मत करें। अपने आप को न कम समझें, न ज्यादा—बस जैसे हैं, वैसे ही अच्छे हैं। कोशिश करें कि आपका होना दूसरों की life में कुछ positive contribute करे।

Reminder: Comparison करके अपना stress और anxiety बढ़ाएँ नहीं, और अपनी mental health को compromise मत करें।

फिर मिलेंगे एक और ब्लॉग में। तब तक के लिए, अपना phone छोड़ें और अपनी life का समय सही तरीके से उपयोग करें!

By focuskar

मैं अमित जोशी, एक साधारण इंसान हूँ जो कभी इंटरनेट की लत (Internet Addiction) में उलझा हुआ था। अब अपनी डिजिटल डिटॉक्स यात्रा और अनुभवों के ज़रिए दूसरों को सजग जीवन (Mindful Living) और एकाग्रता (Focus) की राह दिखाने का प्रयास कर रहा हूँ। आप अपने अनुभव मुझसे साझा करना चाहें तो मुझे इस ईमेल पर लिख सकते हैं: amitjoshig@gmail.com

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