सोशल मीडिया (Social Media) की दुनिया बहुत चमकदार लगती है। कभी किसी दोस्त की यात्रा (travel) की फोटो, कभी किसी का birthday celebration, कभी किसी का professional event – सब कुछ इतना खुशहाल दिखाई देता है कि हमें लगता है कि उनकी life बिल्कुल perfect है।
लेकिन सच्चाई ये है कि –
👉 एक फोटो, एक video या एक मुस्कान पूरी ज़िन्दगी का सच नहीं होती।
👉 वो सिर्फ एक पल (moment) होता है, और उस पल की झलक को हम पूरी ज़िन्दगी मान लेते हैं।
1. क्यों हम एक पल की मुस्कान को पूरी ख़ुशी मान लेते हैं?
- हमारी conditioning ऐसी हो चुकी है कि smiling faces = happiness मान लिया गया है।
- अगर कोई tour की photo में मुस्कुरा रहा है, तो हमें लगता है उसका पूरा tour शानदार चल रहा है।
- अगर कोई cricket match में wicket ले रहा है और photo viral हो गई, तो हमें लगता है कि उसका पूरा match बेहतरीन रहा।
- पर क्या कभी सोचा है कि ये सिर्फ एक second की मुस्कान है?
यही तो social media addiction की सबसे बड़ी चालाकी है। हम दूसरों की highlight reel देखते हैं और उसे उनकी पूरी ज़िन्दगी का सच मान लेते हैं।


2. मेरे आस-पास के कुछ personal experiences
मेरे अपने जानने वालों की ज़िन्दगी से कुछ उदाहरण –
- मेरा एक दोस्त है जो हर समय घूमने-फिरने में लगा रहता है। उसकी photos देखकर लोग समझते हैं कि उसकी life बहुत मज़ेदार है। लेकिन हकीकत ये है कि इस लगातार घूमने की वजह से उसका खुद का business almost बंद हो गया है।
- दूसरा दोस्त है जो foreign trips और अलग-अलग लड़कियों के साथ photos डालता है। Social media पर वो बहुत stylish और successful दिखता है, लेकिन सच ये है कि वो बेरोज़गार है और उसे दिखावा (show-off) करने की आदत है।
- एक event organizer, जो रोज़ अपने काम की photos पोस्ट करता है। हक़ीक़त ये है कि वो बार-बार वही पुराने event की photos डाल रहा होता है क्योंकि उसके पास इस समय नया काम ही नहीं है।
- एक wedding और event photographer, जो लगातार बड़े-बड़े celebrities के साथ photos और videos डालकर अपनी success दिखाता है। लेकिन सच ये है कि वो काफ़ी कर्ज़ में दबा हुआ है और struggle कर रहा है।
3. Celebrities भी इससे अलग नहीं
सोचिए, अगर actors और celebrities की ज़िन्दगी भी बाहर से perfect लग सकती है लेकिन अंदर से वो उतने ही परेशान हों, तो फिर हम आम लोगों का क्या कहना!
- शाहरुख़ ख़ान ने खुद एक interview में बताया था कि जब वो DDLJ का मशहूर गाना “तुझे देखा तो ये जाना सनम” शूट कर रहे थे, उस समय उनकी real sister को गंभीर मानसिक समस्या हुई थी और वो hospital में admit थीं। अंदर से शाहरुख़ दुखी थे, लेकिन स्क्रीन पर वो हँसते और नाचते दिख रहे थे।
- Govinda ने एक बार कहा था कि Hero No.1 की शूटिंग के दौरान उनकी माँ की तबियत बहुत बिगड़ गई थी। उस समय वो emotionally disturbed हो गए थे और खुद को तकलीफ़ पहुँचाने लगे थे।
- आमिर ख़ान को 3 Idiots की शूटिंग के दौरान पता चला कि उनकी wife Kiran Rao का miscarriage हो गया है। आप सोच सकते हैं उस वक्त उनका मानसिक हाल कैसा रहा होगा।
मतलब ये कि पर्दे पर दिख रही मुस्कान और असल ज़िन्दगी की परेशानियों में बहुत फ़र्क होता है।


4. हम सबकी ज़िन्दगी में भी ऐसा होता है
कभी आपने गौर किया है?
- आप किसी खूबसूरत tourist spot पर जाते हैं। वहाँ पर आपको अंदर से बहुत तनाव (stress) होता है – office की tension, family problems, relationship issues – पर आप एक photo खिंचवाते हैं और सोशल मीडिया पर डाल देते हैं। बाकी सबको लगता है – “वाह! ये तो बहुत खुश है।” लेकिन सच ये है कि उस photo के पीछे आप परेशान थे।
- Family get-together की photos देखकर दूसरों को लगता है कि ये family कितनी united और happy है। लेकिन सच ये है कि कई बार उसी get-together के बीच arguments और लड़ाईयाँ भी चल रही होती हैं।
👉 यानी photo या video देखकर किसी की ज़िन्दगी का अंदाज़ा लगाना पूरी तरह गलत है।
5. असली सीख (Lesson) – Social Media ≠ Real Happiness
- Social media posts सिर्फ एक captured moment होते हैं। ये permanent happiness का सबूत नहीं हैं।
- Comparison करना छोड़िए – किसी की Instagram feed देखकर ये मत सोचिए कि उनकी life perfect है और आपकी boring।
- अगर सच में ज़िन्दगी को बेहतर बनाना है तो digital detox अपनाइए।
- अपनी mental health, focus और छोटी-छोटी चीज़ों में happiness ढूँढिए।

6. अंत में (My Personal Note)
दोस्तों, मेरी यही सलाह है –
👉 सोशल मीडिया पर दिखने वाले चेहरे सिर्फ moments हैं, पूरी life नहीं।
👉 comparison करके खुद को दुखी मत कीजिए।
👉 खुशी आपको अपनी छोटी-छोटी achievements, रिश्तों और health में ढूँढनी होगी।
याद रखिए –
ख़ुशी तस्वीरों में नहीं, आपके भीतर है।
और जब आप खुद को समझना शुरू कर देंगे, तब आपको किसी और की मुस्कान से अपनी खुशी measure करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

