सच बोलें तो यह कहानी आजकल लगभग हर नौकरी करने वाले इंसान की है। दिनभर ऑफिस में काम करके घर लौटते ही लोग बोलते हैं – “अब तो टाइम ही नहीं बचा। बहुत थक गया हूँ। अब कहाँ passion follow करूँ या कुछ नया सीखूँ?”
लेकिन जैसे ही रात को बिस्तर पर लेटते हैं, वही थका हुआ इंसान अचानक energy booster पीकर जगा रहता है और मोबाइल पर स्क्रोल करता है – YouTube, Instagram, Facebook, Reels, Memes, News… और देखते-देखते रात के 2–3 बज जाते हैं।
तो सवाल ये है कि काम करते समय नींद क्यों आती है, लेकिन मोबाइल देखने पर नींद क्यों गायब हो जाती है? और इसका असली solution क्या है?

दिमाग का खेल – Dopamine
मोबाइल पर जब हम scrolling करते हैं तो दिमाग को हर कुछ सेकंड में dopamine नाम का reward chemical मिलता है।
- हर नई Reel, नया वीडियो, नया meme → एक छोटा reward।
- दिमाग को instant मज़ा मिलता है।
वहीं जब हम किताब पढ़ने बैठते हैं, कोई नया कोर्स सीखने की कोशिश करते हैं या अपने passion पर काम करते हैं, तो उसमें reward जल्दी नहीं मिलता। नतीजा? – दिमाग boring मानकर नींद लाने लगता है।
👉 यही वजह है कि Social Media Addiction से नींद रात में गायब हो जाती है, लेकिन constructive काम करते वक्त नींद घेर लेती है।
काम के बाद थकान का झूठा बहाना
ज़्यादातर लोग बोलते हैं – “ऑफिस के बाद टाइम ही कहाँ है? बहुत थकान रहती है।”
पर असली सच ये है कि थकान से ज़्यादा दिक़्क़त है mindset की।
जब दिमाग को phone मिल जाता है तो वही इंसान 3–4 घंटे बिना रुके mobile surfing कर लेता है। लेकिन जब वही समय किताब पढ़ने या कोई नया skill सीखने की बात आती है तो अचानक शरीर नींद माँगने लगता है।
यानी थकान असली नहीं है, बल्कि दिमाग का escape mechanism है।

रात का “Me Time” और उसका जाल
दिनभर काम के बाद हर इंसान चाहता है कि “थोड़ा अपना समय मिले।” और ये इच्छा बिल्कुल normal है। लेकिन दिक़्क़त तब होती है जब वो “me time” सिर्फ mobile screen time बनकर रह जाता है।
इस आदत की वजह से:
- नींद खराब होती है।
- अगला दिन dull और lazy लगता है।
- Passion या learning के लिए कभी energy बचती ही नहीं।
अब समाधान की बात – क्या करें?
अब सिर्फ problem गिनाने से कुछ नहीं होगा। असली मज़ा तो solutions में है। यहाँ कुछ simple लेकिन powerful habits हैं:
1. Digital Detox Hour अपनाइए
रात को ऑफिस से आने के बाद कम से कम 1–2 घंटे का “नो मोबाइल ज़ोन” रखिए।
- फोन को दूसरे कमरे में चार्ज पर लगाइए।
- उस समय को सिर्फ अपने passion, किताब या learning के लिए इस्तेमाल कीजिए।
👉 इससे दिमाग समझेगा कि reward सिर्फ phone से नहीं, किसी और चीज़ से भी मिल सकता है।

2. काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटिए
नया skill सीखना या passion follow करना बड़ा काम लगता है। इसलिए दिमाग कहता है “छोड़, बहुत मेहनत लगेगी।”
- अगर नई भाषा सीखनी है तो एक दिन में सिर्फ 10 नए शब्द सीखिए।
- अगर गिटार सीखना है तो सिर्फ 15 मिनट practice करिए।
छोटे-छोटे steps भी long run में बहुत बड़े results देते हैं।
3. “Me Time” का असली इस्तेमाल
अगर आप दिनभर काम के बाद me time चाहते हैं, तो mobile surfing के बजाय कोई creative चीज़ कीजिए।
- Drawing, Writing, Music, Meditation, Reading…
- ये सब आपको relax भी करेंगे और passion भी alive रखेंगे।

4. नींद को priority दीजिए
रात भर जागकर phone scroll करना cool नहीं है। यह slowly आपकी productivity और health को खा रहा है।
- रोज़ एक fixed time पर सोने की आदत डालिए।
- सोने से 1 घंटा पहले mobile और screen से दूर रहिए।
- Bedroom को phone-free zone बनाइए।
5. Phone को reward system बनाइए
हर काम के बाद खुद को 10–15 मिनट का mobile time दीजिए।
- पहले काम पूरा → फिर phone।
- इससे phone addiction कम होगा और दिमाग काम को भी reward से जोड़ने लगेगा।

आख़िरी बात
देखो, सच्चाई ये है कि हमारे पास समय की कमी नहीं है, बल्कि time management की कमी है।
अगर आपके पास रात में 3 घंटे phone scroll करने का वक्त है, तो उतना ही वक्त आप अपने passion या learning को भी दे सकते हैं। फर्क बस इतना है कि mobile आपको तुरंत मज़ा देता है, लेकिन passion आपको धीरे-धीरे मज़बूत बनाता है।
तो अगली बार जब आप ये बहाना बनाएँ कि “थक गया हूँ, अब क्या नया सीखूँ” – एक बार सोचिए कि क्या थकान सच है या बस mobile addiction का excuse है?

