खाना खाते समय हम मोबाइल क्यों देखते हैं?

चाहे घर हो या फिर किसी भी कैफ़े या रेस्टोरेंट में चले जाइए – एक कॉमन सा सीन नज़र आएगा। सामने प्लेट में गरमा-गरम खाना रखा है, लेकिन नज़रें प्लेट पर नहीं बल्कि mobile screen पर टिकी हैं। एक हाथ से कौर और दूसरे हाथ से स्क्रॉल।

पहले यह आदत सिर्फ बच्चों तक सीमित थी। मम्मी-पापा बच्चों को खाना खिलाने के लिए कार्टून या वीडियो चला देते थे ताकि बच्चा जल्दी खाना खा ले। उस समय यह “ट्रिक” लगती थी। लेकिन धीरे-धीरे वही ट्रिक हम सबकी habit बन गई। आज आलम यह है कि चाहे कॉलेज का छात्र हो, कामकाजी इंसान हो या घर पर रहने वाले अंकल-आंटी – सबको प्लेट के साथ phone सर्व होना ज़रूरी लगता है।

सोचने वाली बात है – खाना खाना तो एक सामान्य ज़रूरत है, फिर भी हमें क्यों लगता है कि बिना मोबाइल यह अधूरा है? आखिर दिमाग को ऐसी aadat क्यों पड़ गई है कि कौर के साथ-साथ स्क्रॉल भी ज़रूरी लगे?

चलिए, इसके पीछे की मनोविज्ञान (psychology), इसके side effects और इससे बचने के उपायों पर बात करते हैं।


दिमाग और बोरियत का रिश्ता

जब हम अकेले बैठकर खाना खाते हैं, तो कुछ ही मिनटों में बोरियत महसूस होने लगती है। हमारा दिमाग तुरंत किसी stimulation की तलाश करता है। और यही गैप सबसे तेज़ी से mobile phone भर देता है।

असल में यह सब दिमाग की केमिस्ट्री का खेल है। जब हम reels देखते हैं, social media scroll करते हैं या WhatsApp check करते हैं तो dopamine नाम का “feel-good” केमिकल रिलीज़ होता है। धीरे-धीरे यही dopamine हमारी ज़रूरत बन जाता है और खाना बिना फोन के बेस्वाद लगने लगता है।


मल्टीटास्किंग की आदत

आजकल हम सबको multitasking की आदत पड़ चुकी है। हमें लगता है कि हर समय का पूरा इस्तेमाल होना चाहिए। इसीलिए खाना खाते-खाते भी लगता है कि “चलो Instagram scroll कर लेते हैं।” लेकिन हक़ीक़त यह है कि इससे न खाना ठीक से enjoy होता है और न ही content absorb होता है।


FOMO – Fear of Missing Out

एक और बड़ा कारण है FOMO। हमें लगता है कि अगर phone को थोड़ी देर के लिए भी दूर रखा तो शायद कोई ज़रूरी notification miss हो जाएगी, कोई trending meme छूट जाएगा या WhatsApp group में कुछ interesting बात हो जाएगी। यही डर हमें खाने के वक्त भी फोन की ओर खींच लेता है।

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इसके नुकसान (Side Effects)

1. Mindless Eating

मोबाइल पर ध्यान देने की वजह से हम यह महसूस ही नहीं कर पाते कि कितना खा चुके हैं। नतीजा – overeating, digestion की समस्या और कई बार acidity भी।

2. स्वाद का कम होना

जब हमारा ध्यान खाने से ज़्यादा phone पर होता है, तो हमें खाने का असली स्वाद ही महसूस नहीं होता। यानी mindful eating गायब हो जाती है।

3. पारिवारिक रिश्तों में दूरी

पहले dinner table बातचीत और bonding का समय होता था। अब हर किसी का ध्यान अपने-अपने फोन में होता है। नतीजा – एक ही मेज़ पर बैठकर भी सब अलग-अलग दुनिया में।

4. पाचन पर असर

वैज्ञानिक कहते हैं कि जब हम ध्यान से चबाकर खाते हैं तो enzymes बेहतर तरीके से काम करते हैं। लेकिन phone distract करता है, chewing जल्दी-जल्दी होती है और digestion बिगड़ जाता है।

5. तनाव और mood swings

खाने के दौरान जो content हम consume करते हैं (जैसे negative news या random reels), उसका सीधा असर mood और stress पर पड़ता है। यानी healthy खाना खाने के बावजूद असर उतना positive नहीं रहता।


इससे बचने के आसान उपाय

1. डाइनिंग टेबल को Phone-Free Zone बनाइए

एक छोटा सा नियम बना लीजिए – खाने की मेज़ पर mobile phone नहीं। जब परिवार के साथ खाना खा रहे हों तो सभी लोग इस नियम को मानें।

2. अकेले हैं तो संगीत या Podcast सुनें

अगर boredom सबसे बड़ी समस्या है, तो स्क्रीन देखने के बजाय हल्का संगीत या कोई meaningful podcast सुनें।

3. Mindful Eating अपनाइए

हर कौर को महसूस कीजिए – उसका स्वाद, उसकी खुशबू, उसका texture। धीरे-धीरे खाना एक enjoyable experience बन जाएगा और यही असली digital detox है।

4. छोटी प्लेट और धीमी गति से खाना

छोटी प्लेट से portion control होता है और धीरे-धीरे खाने से दिमाग को signals मिलते हैं, जिससे overeating कम होती है।

5. रिमाइंडर लगाइए

अपने phone पर wallpaper या sticky note लिख दीजिए – फोन नीचे रखो, खाना enjoy करो।” यह छोटा सा reminder भी बड़ा फर्क डालता है।


आख़िरी बातें

फोन देखते हुए खाना खाना एक छोटी सी आदत लग सकती है, लेकिन इसका असर बड़ा है। यह सिर्फ पाचन की समस्या नहीं है, बल्कि हमारी focus ability, family bonding और lifestyle पर भी सीधा असर डालता है।

खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं होता, बल्कि स्वाद लेने और परिवार के साथ जुड़ने का समय भी होता है। अगर हम खाने के दौरान phone को एक तरफ रखकर plate के साथ present रहना सीख लें, तो सेहत भी सुधरेगी और ज़िंदगी का स्वाद भी।

तो अगली बार जब सामने खाना रखा हो और हाथ अपने आप phone की तरफ जाए, तो एक बार सोचिए –
👉 “मुझे खाना enjoy करना है या phone scroll करना है?”

By focuskar

मैं अमित जोशी, एक साधारण इंसान हूँ जो कभी इंटरनेट की लत (Internet Addiction) में उलझा हुआ था। अब अपनी डिजिटल डिटॉक्स यात्रा और अनुभवों के ज़रिए दूसरों को सजग जीवन (Mindful Living) और एकाग्रता (Focus) की राह दिखाने का प्रयास कर रहा हूँ। आप अपने अनुभव मुझसे साझा करना चाहें तो मुझे इस ईमेल पर लिख सकते हैं: amitjoshig@gmail.com

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