क्या आपने कभी notice किया है कि जब हम already परेशान होते हैं और फिर social media पर ज्यादा time spend करते हैं, तो दिक्कतें और बढ़ जाती हैं? जब हमारा मन दुखी होता है तो हमें लगता है कि Instagram, YouTube या endless scrolling से ध्यान बंट जाएगा, लेकिन होता इसका उल्टा है।
Social media पर दूसरों की highlighted life देखकर हमें लगता है कि सबकी ज़िंदगी perfect है, और हमारी problems और भी बड़ी लगने लगती हैं। यही Internet Addiction का सबसे खतरनाक असर है।
Problem से भागना vs Problem solve करना
अगर आप किसी परेशानी से बचने के लिए internet या social media का सहारा लेते हो, तो सच मानिए—वो problem कभी solve नहीं होगी। उल्टा, आपका कीमती time waste होगा और mind और ज्यादा confused हो जाएगा।
मेरा खुद का personal experience यही रहा है। कई सालों तक मैं भी इसी trap में फँसा रहा। Focus, time management और productivity improve करने के लिए internet पर articles पढ़ता, videos देखता, लेकिन फायदा zero। दिमाग में extra information भरती रही, लेकिन real-life action zero।
Digital Detox से क्या बदला?
जब मैंने अपनी useless internet surfing बंद की, तब जाकर असली बदलाव आया। अब:
- मैं problems को real life में face करता हूँ।
- दूसरों की highlight reel देखकर खुद की तुलना करने की आदत almost खत्म हो गई है।
- मेरा focus सिर्फ अपने काम पर है।
- Productivity और mental peace दोनों बढ़ गए हैं।
Social media पर endlessly scroll करने से पहले सोचिए:
- क्या ये आपके काम आ रहा है?
- क्या इससे stress कम हो रहा है या और बढ़ रहा है?
सच तो ये है कि dopamine hit की वजह से हमें temporary मज़ा लगता है, लेकिन असल में stress और anxiety बढ़ती है।



Social Media Detox क्यों ज़रूरी है?
दोस्तों, सिर्फ cheap entertainment या थोड़ी देर की dopamine release के लिए अपनी ज़िंदगी का time waste मत कीजिए।
अगर stress है, तो उसको solve करने की कोशिश कीजिए:
- किसी दोस्त से बात करिए
- बाहर घूमने जाइए
- meditation, journaling या exercise कीजिए
मुझ पर भरोसा कीजिए—जितनी राहत आपको mobile छोड़कर real life activities से मिलेगी, उतनी कभी भी endless scrolling से नहीं मिलेगी। यही असली Digital Detox का फायदा है।

